Cash vs UPI which is better Real Life Experience

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मैंने ख़ुद दो दिन मार्केट में जाकर कैश और UPI दोनों का अनुभव लिया और जो रिजल्ट आया वो बहुत ही चौक़ाने वाले निकला।

मैं सोचा कि आजकल लोग सबसे ज़्यादा किस पेमेंट मेथड का इस्तेमाल करता है बाज़ार माँ ख़रीददारी के लिए तो फिर पता चला कि सबसे ज़्यादा लोग UPI का इस्तेमाल करता है।

मोमोज़ से लेकर क़ुल्फ़ी या सब्ज़ी लेना हो हर जगह phonepe या Paytm या Gpay का इस्तेमाल हो रहा है, कमाल की बात ये कि आजकल एक सब्ज़ी वाला भी QR कोड लगा के रखता है कि लोग 50 रुपया का भी सब्ज़ी लेगा तो आराम से स्कैन करके पेमेंट कर देगा।

लेकिन UPI के नुक़सान के बारे में कोई बात नहीं करता है, मैंने सोचा इसपर एक डेटेल्स में आर्टिकल लिखूँगा लेकिन उससे पहले ख़ुद इसका इस्तेमाल करके अनुभव ले लू तभी तो सही से लिख पाऊँगा।

UPI का experience बाज़ार में।

मैं सबसे पहले अपने बाज़ार में गया और pizza का ऑर्डर दिया डोमीनोज़ से उसी के स्टोर पर बैठ के खाया और पेमेंट किया phonpe से।

फिर याद आया कि यार मेरे पास तो rupay credit कार्ड भी है तो ऐसे में cred में लिंक करके रखा हुआ हूँ फिर अगली बार फ़ोनेपे के बदले मैंने क्रेड से पेमेंट करने का सोचा।

पिज़्ज़ा खाने के बाद मैं, कुछ स्टेशनरी का सामान लिया और क्रेड से पेमेंट किया फिर वहाँ से निकला तो कुछ दोस्त में मिल गया और बोला कि भाई कुछ खर्चा करो, मैंने कहा चलो करते है क्योकि मुझे पता था कि अकाउंट में इस महीने 80000 हज़ार रुपया आया है तो पैसे तो है ही फिर टेंशन किस बात की।

वहाँ से गया और फिर पार्टी हुआ जिसमें समोसा आया, मिठाई आया फिर गर्मी के कारण कोल्ड ड्रिंक का पार्टी हुआ।

सबका पेमेंट मुझे ही करना था तो इस बार देखा कि दुकानदार तो चलाक है, उसने अपने QR डिवाइस में क्रेडिट कार्ड से accept करने वाला ऑप्शन बंद करके रखा हुआ है फिर मुझे मजबूरी में अपने बैंक अकाउंट मतलब की फ़ोनेपे से पेमेंट करना पड़ा।

जब लास्ट में रात में घर आने लगा तो घर के लिए मोमोज़ भी ले लिया और सब्ज़ी तो लेना ही था ऐसे में पूरा पेमेंट मैंने सिर्फ़ ऑनलाइन किया कोई भी कैश में नहीं किया और फाइनली देखा की मेरा ख़र्च दो हज़ार से ऊपर का हुआ था, और भी कुछ कुछ ले लिया था जिसको मैं इस पोस्ट में नहीं लिख सकता हूँ लेकिन जो लिया वो बहुत ज़रूरी भी नहीं था लेकिन मार्केट में दिखा तो ख़रीद लिया।

cash से ख़रीददारी का experience

कल मैं फिर से सोचा कि अब कैश से ख़रीदारी करता हूँ तो मैंने अपने HDFC बैंक के करंट अकाउंट से पैसे ATM से निकाला टोटल सिर्फ़ 5000 और उसमे से 3000 घर में रख दिया जानबूझ के और सिर्फ़ दो हज़ार कैश लेकर मार्केट निकला।

सोच के चला था कि आज किसी भी हाल में ऑनलाइन पेमेंट इस्तेमाल नहीं करूँगा चाहे जो हो जाए।

फिर से वही रूटीन रहा, कुछ कुछ मार्केट में खाया फिर मार्केट में मुझे गिफ्ट वाला दुकान दिखा और सोचा कि रूम में रखने के लिए एक डिज़ाइन वाला ले लेता हूँ और जब पैसे देते टाइम कैश दे रहा था तो मुझे बहुत ख़राब लगा कि यार इतना महँगा।

मतलब मैंने दुकानदार से बार्गेनिंग किया और फिर पाँच सौ के नोट दिया और कुछ पैसे वापस भी लिया।

वहाँ से उठ कर जब मैं क़ुल्फ़ी वाले के पास गया और खाने के बाद कैश दिया तो वो बोला भी की भैया आप तो हमेशा ऑनलाइन पैसे देते है आज कैश कैसे, तो मैंने कहा आज मोबाइल भूल गया हूँ, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि क़ुल्फ़ी बहुत महँगी है , जबकि मैं उसकी क़ुल्फ़ी वाले से क़ुल्फ़ी कभी ना कभी खाता ही रहता हूँ।

फाइनली मैं घर आते समय घर के लिए आइस क्रीम का फ़ैमिली पैक buy कर के घर आ गया।

Cash vs UPI Which is better

फाइनली मुझे इसका जबाब मिल गया की कैश बढ़िया है या UPI? तो इसका जबाब है दोनों अलग अलग कंडीशन में फ़ायदेमंद है।

अगर easy payment मेथड की बात करे तो UPI से बढ़िया कुछ नहीं है, लेकिन UPI के नुक़सान ये है कि आपको real money का अहसास नहीं होता है जिससे फ़िज़ूल खर्च होते रहता है और आपको अहसास भी नहीं होता है।

लेकिन कैश लेकर जब खर्च करते है तो आप बहुत बचा बचा कर खर्च करते है, जैसे की अगर मार्केट में आपको UPI के इस्तेमाल करते टाइम मालूम रहता है कि आपके बैंक अकाउंट में टोटल कितना पैसा है तो आप बिना लिमिट का कुछ भी खर्च कर देते है।

बाद में जब घर में आते है तो सोचते है की बेकार में खर्च कर लिया लेकिन तब तक आपके बैंक से पैसे खर्च हो चुका रहता है।

लेकिन कैश में जितना मार्केट लेकर जाते है उससे ज़्यादा खर्च आप नहीं कर सकते है जिससे आपकी बचत होती है।

जब पैसे नहीं रहते है तो घर आने पर उस सामान को दुबारा से ख़रीदने के निर्णय पर फिर से विचार करते है और maximum टाइम में हुआ ये कि आपको लगता है बेकार में पैसे क्यों खर्च करे।

इससे बचत ज़्यादा होता है, आजकल युवाओं में सबसे बड़ी समय पैसे की बचत की है, युवा बचत करना नहीं सीख रहे हैं जिसके कारण उने EMI या क्रेडिट कार्ड पर ज़्यादा डिपेंड रहना पड़ता है।

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